सोमवार, 6 मई 2019

वर्णसंग्राम

एक समय था देश में,
संघर्ष विवरणों से जारी था।
अधिकार, अस्मिता, आत्मसम्मान उदय ,
लोभ, घृणा, द्वेष पर भारी था !!

समए  बदला, निज़ाम भी !
अब वर्णो की अलग परिभाषा भी !!
वर्णो में टकराव का वेग रहा फिर भी !
वर्णो में वर्गभेद मिटने की प्रत्याशा भी !!

अब संघर्ष था नए लक्ष की खोज में ,
लोभ, घृणा, द्वेष पर नज़र की बारी है!
वर्णाश्रम के खंडहारों को समेटकर ,
आरक्षण  झुनझुने से , बिगुल फूकने की तयारी है !!

सघर्ष की ये  दिशाहीन लालसा ने
वर्णो को गृहयुद्ध की कगार दे दिया है !
मेरे घर की रौशनी तेरे घर से काम क्यों हो ?
उपचार में, फूँक मारकर, पूरा वतन अन्धकार कर दिया !!

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