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संदेश

द्विचर

दो नाव पर पांव डार जलधी पार जाने का विचार उसपर उल्टे पतवार, मूर्खता कहलाती है । हमको इसकी सलाह क्यों दी जाती है ?  क्यारियों में अलग अलग फूल, अच्छे है। बीच में कुछ शूल भरे खार पतवार के गुच्छे है। इनको अगर मैं उखाड़ दूं, ग़लत क्या है ? आखिर, वन और उपवन में भेद से गफलत क्या है? आलोक का ना होना ही तो तम है  इनमें समन्वय होना बस एक भ्रम है, इस भ्रम को जीवन शैली का आधार बनाना अराजकता की ओर धकेलने का है बहाना !!  समय भस्म के कब्रों में कर्म छुपा ना पाओगे। अपने अक्स से सामना होगा, शर्म छुपा ना पाओगे !! ये वैश्विक होने का , टूट चुका है भंगुर ताशघर  । अपनी चाल भूल चुके, नकल उतार तुम बने द्विचर !! 
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Flaud Teri Shiksha Neeti

कहां आर्यभट्ट, कहां ऋषी कणाद ? कहां ब्रम्हगुप्त, कहां मुनी अगस्त? ग्रैजुएट, मास्टरस कितने पढ़े लिखे एक मैथ्स की प्रौबलेम, सबको दस्त!  ज़िरो दिया हमने, दिया दशम्ळव, लगे रट्टा मार, मरे साईंस का लव! त्रीकोणमिती देने वाले, थीटा पाई से डर गए! लगा कैलकुलेटर हाथ, बंदे बिगड़ गए!! फ्लौड (3) , तेरी शिक्षा नीती !  कहीं अच्छी थी अपनी, दिक्षा नीती !! परमार का पता है, न मुक्तपीड़ का पता!  शुश, पता न चले सोहेलदेव की कथा !! भर भर के झूठ, ईतीहास के नाम परोसते रऔ!  लालची लुटेरे पुर्वज सोच सोच कोसते रऔ ! विद्या ददाती विनयम् , विनए ददाती  पात्रताम् ! पंद्रह से सत्रह साल की पढ़ाई, मै निकला बेशरम !! 190 साल की लड़ाई, कोट पैंट टाई में गवाई ! संघर्ष ६१० साल का निरंतर, हमको नहीं पढाई ?  फ्लौड (3) , तेरी शिक्षा नीती !  कहीं अच्छी थी अपनी, दिक्षा नीती !! १२ साल की स्कूलिंग, ५ साल की इंजीनियरिंग हम सब सारे हुक्म के गुलाम, बजट फेयरिंग !!  

युद्ध घोष

नूह, नागपुर, मुर्शिदाबाद, पुलवामा हो या पहलगाम ! कुछ अंतर नहीं है इनमे,  सब अल जिहाद के घाव तमाम !! भत्सनाओं का समय निकल गया, अबतो शुरू करो इनको मिटाना ! और इनके जो है सारे सहकारी बुलडोज़र तले हो इनका ठिकाना !!  विक्सित भारत है स्वप्न तुम्हारा गज़वा -ए - हिन्द उनको चाहिए ! सिमी, प.फ.आई , आई. एम बनाने  मिलते है कहाँ से जो लोग चाहिए ?  वो जो है, उनको वही कहना सीखो मिमयाना छोडो, अब शेर बनकर जीना है।   अल जिहाद से युद्ध की हो चुकी घोषणा अब भिड़ाकर देखेंगे बारूदों से फौलादी सीना !! जन्नत के परवानो से लड़ना है तुमको जानो, इस युद्ध के है आयाम कई! शोणित से लाल होगी गलियां सभी चुकाने पड़ेंगे हमको भी दाम कई ! इस युद्ध को परिणाम देने, जिहाद के निर्गत तक जाना होगा ! संक्रमन सफाई प्रयाप्त नहीं, उद्गम तक जाकर, समाधान का अभियंता बन जाना होगा।  अब इस रण में, जो भी विघ्न बनेगा गांडीव से शर उस ओर भी जाएगा। गंगा-जमुनी तहजीब का चूरन, जिसने अब चखाया, वो पछताएगा।   

धर्म संकट

बाहर के आतंकी हो  या अंदर के दंगाई ! एक भाषा एक ही लक्ष  एक सी झंडों की रंगाई !! सिंघासन जो राजदंड का करे प्रहार  बुद्धिजीवी चींखे,  लूटा मानवाधिकार ! पहले किया निहत्था, फिर हुआ जनसंहार  सनातन को विधिवत जीने का मिलता उपहार !! नस्लों में विषैले विचार बोने वाले सम्मान निधि पा जीवन रहे गुज़ार।  अधर्म ग्रन्थ सीखाने वालों को, हम धर्मप्रचारक पुकार रहे।।  उनपे फ़र्ज़ है क़त्ल तुम्हारा, और  तुम चादर चढाने चले मज़ार।   यात्रा की शोभा है फूटा हुआ हिन्दू सर तुम ही पीड़ित, तुमपर ही धिक्कार !! व्यवस्था का आभाव है, या  शत्रु प्रायोजित अत्याचार ! तय करने में निष्फल तुम्हारी सत्ता नित्य विधि द्वारा भी छाला जाये अधिकार !!   शाकाहारी सिघों का जंगल  मुट्ठीभर वन-स्वानो से घिरे हुए। शांति की भिक्षा व्यर्थ, मिमिया के मांग रहे,   देकर धर्म-संकट की दुहाई, स्व नजरों से गिरे हुए।  

मेरे लिए काफी है , पर !

राम नाम की धुनि रमाकर  या, चिता भस्म से नाहाकर वळख्ळ या दिगंबर धर, वैरागी बन जाना सत्य की खोज, मेरे लिए काफी है, पर !  प्राचीन गुरुओं की वाणी सुन मैं भी लून, मोक्ष की राह चुन हाहाकार कोलाहल से दूर जाकर एकांत का प्रयास, मेरे लिए काफी है, पर !  निश्लीपत, व निष्क्रिय रहकर  आजीविका के लिए सब सहकर  संवेदनहीन हो जाऊं ज्यों प्रस्तर  मेरे लिए काफी है , पर ! कमर्फल एवं समयचक्र की सत्यता जानता हूँ ! धर्म जय को अधर्म का नाश आवश्यक मानता हूँ  ! मोक्ष जीवन  का लक्ष्य अंतिम , मेरे लिए काफी है , पर ! प्रतिकार ना करना, क्या चेतना को दे पायेगा वो स्तर ??

सच्चाई और अच्छाई

सच्चाई की हमेशा जीत होती है ! फिर भी झूठ की बड़ी खरीद होती है !! सामूहिक सच, व्यक्तिगत सच, सारे अलग अलग ! सब आपस में उलझे हुए, अच्छाई के आंसू गए छलक !! सत्य वही जिसका प्रमाण के साथ सत्यापन हो !  चाहे झूठे सारे साक्ष्य उसके, जैसे विज्ञापन हो !! इस द्युत से बचकर मर्यादित अच्छाई  हार जाती है ! सच होने की होड़ में झूठ अच्छाई को पछाड़ जाती है !! जब लोग डरकर दुबक लें, अच्छाई से किनारा करें, हिंसा मान कर, आत्मरक्षा और प्रतिकार को दुत्कारा करें !! तब बेसहारा अच्छाई अपना सच साबित कर नहीं पाती! अच्छे लोगो के अकर्मण्य होने से वो लड़ नहीं पाती !!  प्रत्यक्ष को भी भ्रम ना होने का, सच होने का प्रमाण चाहिए ! अच्छाई  को सच्चाई बनाने के किये कई बलिदान चाहिए !! अब तो समझ जाओ, जीतने के लिए पहले लड़ना ज़रूरी है ! कभी कभी, ज़िंदा हो तुम ये बताने के लिए मरना ज़रूरी है !! 

धरे के धरे

नैटो की सदस्यता, यु एन ओ  में वीटो है ! स्वतंत्र विदेश निति में, आज का मार्शल टीटो है ! बस एक गलती और, चारो ओर आग और धुआँ है ! कालनेमि को गले लगाया, मनो कालकूट विष छुआ है !! आसमान से उत्तरी थी जो , स्वीडेन में जलना जारी है ! लन्दन की सड़कों का हाल, अंग्रेज़  बालाओं पे भरी है !! आस पास के घटनाओ को कर अनदेखा, रहा वो खड़े के खड़े ! अपना देश जल गया, परमाणु बम्ब रह गए धरे के धरे !! सत्तावन में तिरपन ऐसे, जो भाई भाई को काट रहे ! एक उम्मा के कई खलीफा, मज़हब बन्दर बाट सहे !! हम उनके विक्षुप्तों को, शरणार्थी मानते रहे।  और  वे संगठित होकर, कानून शरिया मांगते रहे !! शार्ली हेब्दो ने मारी थी, व्यंग की छोटी सी पिचकारी ! लहू के फव्वारे छूटे, बरसाए बंदूकों से चिंगारी !! सबका साथ, सबका विकास, ऐसे बकवास बंद हो ज़रूरी है ! उनकी कटार तुम्हारी गर्दन, बस एक मौके की दूरी है !!