आदमी पानी सा होता अगर !
आदमी आदमी, पानी सा होता अगर !!
कतरा कतरा मिल जाता ! साथ बहकर
दरिया हो जाता, हो जाता अमर !!
आदमी, पानी सा होता अगर !!
आदमी, पानी सा होता अगर !!
सर्द आहें अगर बर्फ कर देतीं !
गर्म आगोश फिर से पिघला देती !
बनके भाप अगर उड़ जाते !
आसमा में बादल हो जाते !!
बरसते हम दुनिया जाती निखर !
आदमी, पानी सा होता अगर !!
पर,
खुदगर्ज़ी ने काच सा बना डाला !
आपस में दरारों का जाल बिछा डाला !!
इनमे नफरतों का फैला हुआ है ज़हर !
इंसान, इंसानियत पे ढा रहा है कहर !!
काश, आदमी, पानी सा होता अगर !!
पानी में दरारें नहीं पड़ती
बूंदें आपस में नहीं लड़ती
पानी पे सियासत बहुत है मगर
पानी सियासत नहीं करती !!
काश, इंसान का भी होता यूँ रहगुज़र !
आदमी, पानी सा होता अगर !!
आदमी पानी सा होता अगर !
दरिया हो जाता, हो जाता अमर !!
बरसते हम दुनिया जाती निखर !
आदमी पानी सा होता अगर !
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