वो बस इस इंतजार में है,
कब तुम्हारा हौसला टूटे,
उनका काम है उकसाते रहना
जब तक ना क्रोध से सब्र छुटे।
ये राह जो चलनी पड़ेगी
दो धारी तलवार है !
एक तरफ गृह उद्ध रखा है,
दूजे, वो मनमानी पे सवार है।
जो आज कह रहे है,
सड़क से अब शासन होगा।
पत्थर होगा सिर होगा, होगी आग।
सुरक्षा को ना प्रशासन होगा।
वो नहीं बोल रहे, सच्चाई अपनी।
जिन्होंने गणतंत्र डॉलर के एवज में बेचा है।
इंस्टाग्राम में फैलाये झूठ को,
तुम्हारे मस्तिष्क में, एल्गोरिदम से सीचा है।
इस भ्रम से जागो कि, फैसला तुम्हारा था।
उन्हें तुमारी सोच खरीदने मत देना ।
नस्लों के लहू बहाकर, ये आजादी पाई है,
होकर दोबारा गुलाम, उन्हें जीतने मत देना।
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