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नोटा प्रधान तंत्र

ना कांग्रेस की जीत हुई
ना भाजपा की हार हुई
त्रिशंकु विधानसभाओं में
कंज़ोर हर सरकार हुई

वोट प्रतिशत कहते हैं।
यहाँ नोटा वाले ज़ादा रहते है !
गणतंत्र में  साकार उसी की बने
बहुमत से जनता जिसे चुने !!


जब जनता की अदालत में
जनादेश किसी ने नहीं पाया है !
इसलिए बहुमत में, अदृश्य प्रत्याशी
नोटा जीत कर आया  है !!

नोटा के विधायक, मंत्री
मुख्यमंत्री कहा से लाओगे ?
या गणतंत्र की हार मानकर
राज्यपाल की सरकार चलाओगे ?

ये गणित का तोड़ जोड़ है ,
सत्ता पाने की लिप्सा होड़ है !
क्या बहुमत से ये धोका नहीं है?
सब मिले हुए है , किसी ने रोका नहीं है !!

गणतरण के शर्त अनुसार
नोटा की सरकार गढ़ो
या संविधान पर पुनर्विचार
सत्ता का बहिष्कार करो !!




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