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वोकल फॉर लोकल

मेरे गांव का नंदू नाई अच्छे बाल बनाता है। श्राद्ध संस्कार और मुंडन सर्विस स्पेशल डिस्काउंट दिलाता है। नंदू की बीवी गौरा भी घर-घर ब्यूटी पार्लर चलाती है। फेसिअल और घुंगराले बाल आपके घर जाकर कर आती है। क्या कहा? इसमें मेरा क्या फायदा? कमीशन एजेंट नहीं हूँ, बात कुछ और है। अच्छे पड़ोसी होने का फ़र्ज है ये, आजकल वोकल फॉर लोकल का दौर है। बड़े उद्योगपति सब बहुत कमा चुके, कोसना छोड़ो, कर्म करने का तौर है। सपने देना उनका काम, पूरा करना हमारा, समझ लो जब तक मोदीजी सर मौर है।

आत्मनिर्भर

 गुप्त अँधेरे कमरे से कब तक बाहर ताकोगे ? उजालों के लिए कब तक , बंद खिड़कियों से झांकोगे ?  आज चीन से तनी है , तो उसका बसहिष्कार सही। स्वदेशी की सोच, देर करदी शायद? फिर भी विचार सही।  कल फिर किसीसे तनेगी, बहिष्कार का वो वजह देगा। आत्मविश्वास अंगद सा न हुआ, तो इतिहास उसकी सजा देगा। हो सकता है जुमला हो, ये भी देश के चौकीदार का ! खून तुम्हारा भी अगर शामिल है ? तो फ़र्ज़ निभाओ हक़दार का।  

गीता सार सुनो

द्वापर के अंत सा, समय सर्प फुंकार रहा। कुरुक्षेत्र सा सज्जित लेह, रण को ललकार रहा।। फिर से रख गांडीव, दुविधा से ग्रस्त ना होना। इस बार खलेगा, तूणीर में दिव्यास्त्रों का ना होना।। होंगे ऐसे भी चार्वाक जो, अहिंसा परमोधर्म: कहेंगे। शत्रु के मुखपार्त्र बन, कुछ तो जेब अपनी गर्म करेंगे।। क्षत्रिय धर्म पुकारे, जनहित के उचित  कार्य करो। मनुज जीवन पर संकट है, धर्मयुद्ध जा आर्य लड़ो।। राष्ट्रों के बीच की सीमारेखा, विवाद बहुत छोटा है ! जो है प्रतिपक्ष, वो मानवता के इतिहास मे खोटा है !! इस बार परीनाम का न सोचो, उद्देश्य आधार चुनो!  धर्मो रक्षे रक्षित:!,  आततायी का प्रतीकार चुनो!!