संदेश

मुझे हिटलर बहुत याद आता है

मेरी क्षमता, मेरा व्रत!

भारत का प्राचीन गणतंत्र

आखिर घंटी बांधेगा कौन?

दो स्वरुप !

पर एक दिन

अतीत का सैलानी !