गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012

पर एक दिन

आज नसों में साथ खून के
रिश्वत दौड़ा करती है!
जो होता है जो हो रहा है
सच्चाई जान पड़ती है!

पर , एक  दिन  ऐसा आएगा !
हर  शख्स  आज  पर  पछतायेगा ! !
जो  उचित  , और  अनुचित  का !
भेद समझ पायेगा ! !

आभी दौलत के ताकत पर !
हर धनवान इतराता है ! !
ज़रुरत से जादा कमाकर !
तिजोरी भरता जाता है ! !

पर , एक  दिन  आएगा
सड़  , जाएगी तिजोरी  में  दौलत !
लुटती तिजोरी को तडपता रह जायेगा
और वो कुछ ना कर पायेगा !

सत्ता के ताकत पर
 वो अत्याचार करता है ! !
उसकी एक आहत से,
समाज सर झुकाके चलता है

पर , एक दिन  आएगा
विवेक को, कोई झक-झोड़ कर जगायेगा !  !
सब्र ` का  हर  बाँध टुटेगा!
समय , एक  नया  इन्कलाब  लाएगा ।

आज , हर  बगावत  को  किसीने
अपने  स्वार्थ के लिए बहकया है !   !
अपनो  के कंधे पर रखकर ,
गैरों ने बन्दूक चलाई है ! !


पर , एक  दिन  आएगा!
हर इंकलाबी  खुद  को  समझेगा ।
अपनी राह खुद गड़ेगा
किसीके  बहकावे मव नही  आयेग ।

आज  अपनी   है  इनकी हुकूमत  !
अपना ही विधान है ! !
जी तरह चाहे, तोड़े मोड़े पेश करे!  
आज  न्याय , बस  सत्ता  प्रधान है ! !

पर  एक  दिन  आएगा ,
प्रजातंत्र की परिभाषा कोई बदल जायेगा !
योग्यता ही बस  हो जहाँ कसौटी
मानव ऐसा विधान अपनाएगा ! !

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