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ख़ैराती

जो   चीज़ें  ख़ैरात  में पाई जाती है ! अक्सर उनकी औकात बता दी जाती है !! जिन्हे ख़ैरात में इल्म मिली, वो ज़ुबाँ से दगा दे गए ! जो ख़ैरात  में आज़ादी लाये थे, गद्दारी का फलसफा दे गए !! मैंने जो की बेइन्तेहाशा मुहोब्बत वतन से ! वो कह कर दीवाना मुझे, मुझसे किनारा कर गए ! उनकी सोहबत ही क्या करना जो वतनफरोशी को आज़ादी कहते है ! मैं आज भी अपनी उसूलों के दम पे खड़ा हूँ, अच्छा है बेसहारा कर गए !! वो मेरे मुल्क की मिलकियत पे जीते है बड़ी शौक से ! उनकी बदज़ुबानी, वतनपरस्तों पे निकलती है धौंक से !! और हमसे ये चाहें, वो थप्पड़ जमाते रहे, हम गाल बढ़ाते रहें ! हमने  घूर क्या लिए पलटकर, शोर मचने लगे क़त्ल होने के खौफ से !!