शुक्रवार, 19 मार्च 2021

कौन सही ? या मौन सही !


गूजर के राज का तेली,
भोज सिंहासन जा बैठा!!
जो मानस में जागे, वही ठीक! 
अपने ज़िद पर निर-अंकुश ऐठा!!

वैश्य वर्ण के चरण राज सत्ता! 
अर्थ धर्म को गौण कर रहा!! 
आरक्षण सुसज्जित, योग्यता पर बट्टा! 
क्षत्रीय रक्त शीतल,  मौन भर रहा!! 

सम्वेदनाए मगर के अश्रू हुए! 
राष्ट्र सारा बाज़ार कर दिया!! 
चंद गूजर के वैशयों का शासन! 
अर्थव्यवस्था का आधार कर दिया!!  

एक राज्य के अधीनस्त बाकी सारे 
गणतंत्र में साम्राज्यवाद का नया दौर हो गया!!  
हम गृहस्त के कार्यों में उलझे रहे। 
यहाँ राजनीती, अलीगढ से मंदसौर हो गया!! 

पालघर से लखीमपुर तक भटकता बलिदान यहाँ 
बाग़ कहीं शाहीन हुआ, कब्ज़ाबाज़ किसान हो गया। 
कश्मीर भी फिर बना बिहारियों का शमशान वहाँ। 
हिन्दू को बपौती समझ, चौकीदार बेईमान हो गया।

 विकल्प खोजते बन नहीं पड़ता,  न सूझे कौन सही।
 बस अपनो पे चलता है ज़ोर, दोश हमारे गौण सही। 
ध्वनी विरोध की न उपजे, अभिव्यक्ती मौन सही। 
समए हमसे पूछता, पूछें कौन सही, या मौन सही !